गुना
वरिष्ठ वैज्ञानिक, कृषि विज्ञान केन्द्र, आरोन डॉ. अमित कुमार द्वारा बताया हैं कि मधुमक्खी पालन से परागण द्वारा सूरजमुखी, नाइजर, सरसों, कुसुम, तिल, धनिया, बरसीम प्याज, गोभी वर्गीय सब्जिया, सेब, स्ट्राबेरी, लीची आदि फसलों, सब्जियों एवं फल वृक्षों में परागण का कार्य किया जाता है, जिससे लगभग 40-120 प्रतिशत तक उपज वृद्धि होती है। धनिया की फसल में मधुमक्खी द्वारा परागण का कार्य किया जाता है। चूंकि धनिया के फूलो में मकरंद और पराग प्रचुर मात्रा में होते है, वे मधुमक्खियों को आकृषित करते है, जिससे वे एक फूल से दूसरे फूल पर परागण करती है।
धानिया की फसल में मधुमक्खी द्वारा मुख्य लाभ
पैदावार में वृद्धि: मधुमक्खी पालन से धानिया के बीज उत्पादन में मधुमक्खियों के परागण के कारण उपज में 55 से 60 प्रतिशत तक वृद्धि दर्ज की गई है।
बेहतर गुणवत्ता: मधुमक्खियों के कारण बीज बड़े, समान आकार के एवं अधिक वजन वाले होते है, इसके अलावा बीजों में आवश्यक तेल की मात्रा बड़ती है।
प्रभावी क्रास-परागकण: धनिया के फूल प्रोटेंड्रस होते है जिसका अर्थ है कि नर भाग मादा से पहले परिपक्व हो जाता है। इसलिये सफल निषेचन के लिए मधुमक्खियों या अन्य पोलिनेटरों (परागणको) की आवश्यकता पड़ती है, जिससे लगभग 50 प्रतिशत तक परागण सुनिश्चित होता है।
सिफारिश: जब खेत में 10-15 प्रतिशत फूल आ जाने पर 2-3 मधुमक्खी के बक्से प्रति एकड़ रखने की सिफारिश की जाती है।
वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. धवेन्द्र सिह द्वारा किसान भाईयों से अनुरोध है कि मधुमक्खी पालकों द्वारा अपने खेतों पर बॉक्स रखवाकर अपना उत्पादन बढ़ाएं। किसान भाईयों को यह भी सलाह दी जाती है कि मधुमक्खी बाक्स रखने से उत्पादन पर कोई भी विपरीत प्रभाव नही पड़ता है।





